दुनिया का कोई भगवान इतने छोटे मन का नहीं हो सकता कि उसे चापलूसी या पूजा की आवश्यकता पड़ जाए। और ऐसा करने से वह खुश हो जाए या आपका कुछ फायदा करा दे, यह तो संभव ही नहीं। …ऐसा तो सिर्फ शैतान ही हो सकता है।



No God in this world can be so narrow-minded that he needs to be appeased by sycophancy or worship, and if he does gets pleased and favours you, then he cannot be God… He can only be the devil.

हमें न सूरज-चांद उगाने हैं, न गुरुत्वाकर्षण ही सम्भालना है। हमें तो अपने खाये भोजन का खून तक नहीं बनाना है। हमें तो सिर्फ अपने जीवन को आनंद, शांति व सफलता की राह पर लगाना है। क्या यह हास्यास्पद नहीं कि बुद्धिमानी का दावा करने वाले हमसे इतना तक नहीं होता?



Neither do we have to make the sun or moon rise nor manage gravitation. We do not even have to convert the food that we eat into blood. All that we have to do is, put our own life on the path of peace, bliss and success. Isn’t it amusing that we, who claim ourselves to be so intelligent, cannot do even this bit of work?

‘‘मनुष्य’’ जानवरों और पेड़-पौधों से ज्यादा संवेदनशीलता की संभावना लेकर पैदा होता है, परन्तु दुर्भाग्य से वह उसका उपयोग नहीं कर पाता है। क्योंकि वह प्रकृति के साथ जीने के बजाय अपनी बुद्धि से जीने की कोशिश में लगा हुआ है।



A ”human being” is born with far superior potential of sensitivities than animals, trees and plants. But unfortunately, he is unable to utilize it because, instead of living in harmony with nature, he tries to follow his brain.

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