March 5, 2015 9:30 am

अगले क्षण क्या करना यह इस क्षण तय कर लेना प्रकृति के खिलाफ जाना है। आश्चर्य है लोग-बाग तो बड़े होकर क्या बनना से लेकर कब मंदिर जाना व कब उपवास व रोजे रखना यह भी तय कर लेते हैं। अब प्रकृति के इतने खिलाफ जाओगे तो उसके कोप का भाजन तो बनना ही पड़ेगा।

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