April 27, 2016 9:30 am

क्या आप जानते हैं कि मनुष्य और चुंबक एक-सा व्यवहार करते हैं। जान लो, खुद को समझने में आसानी होगी।

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जैसे चुंबक में नॉर्थ और साउथ पोल होते हैं वैसे ही मनुष्य में भी अच्छे व बुरे भाव होते हैं। जैसे चुंबक विपरीत पोल से आकर्षित होता है वैसे ही मनुष्य भी अपने भीतर के विपरीत से आकर्षित होता है।

और यह बात स्त्री-पुरुष की नहीं कर रहा हूँ। वह तो समझे, प्राकृतिक है परंतु मैं यहां बात मनुष्य के व्यक्तित्व की कर रहा हूँ। उसे मालूम भी नहीं होता है कि स्वभाव के तल पर भी वह अपने विपरीत से इस कदर आकर्षित हुआ पड़ा होता है। क्योंकि यह आकर्षण उसके मन की गहराइयों से निकलता है जिस पर अभी अधिकांशों का कोई बस नहीं है, क्योंकि उन्हें अपने इस ऑटोमेटिक आकर्षण वाले स्वभाव का कुछ पता ही नहीं है।

परंतु स्वभाव के विपरीत के आकर्षण के इस नियम का फायदा उठाते आना हमारे बड़े काम का है। जिस-जिस चीज के प्रति आप आकर्षित होते हैं, समझ लो वह भीतर नहीं है। उदाहरण के तौर पर आप बाहर इज्जत चाहते हैं तो वह इसलिए कि अभी आप भीतर अपनी इज्जत के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। आप बाहर सफलता से आकर्षित हुए घूम रहे हैं तो समझ लो कि भीतर कहीं-न-कहीं आप असफलता महसूस कर रहे हैं। और वैसे ही यदि आप बाहर धर्म व भगवान खोजने को मजबूर हैं तो अच्छे से जान लो कि अभी आपने अपने भीतर धर्म और भगवान को महसूस नहीं किया है। बस वह कमी पूरी करने हेतु ही दर-दर भटक रहे हैं।

होगा, अभी तो कहने का तात्पर्य यह कि हमारे स्वभाव का यह विपरीत से आकर्षण वाले नियम का हमें उपयोग करना आ जाए तो इससे हमें अपनी वास्तविक कमियों का पता चल जाता है। और जीवन को अच्छे से आगे बढ़ाने हेतु यह बड़ा ही लाभदायक व परिणामकारी है।

– दीप त्रिवेदी