यदि आपको अपने व्यक्तित्व पर पूरा भरोसा हो तो आप पर दूसरे के मान-अपमान का कोई असर नहीं होगा।



If you have full confidence in your personality, the respect and insults of others will have no effect on you.

आपके मन में छिपे दुःख, क्रोध, चिंताएं व Frustration वगैरह को सिर्फ ‘‘मन का विज्ञान’’ समझकर ही दूर किया जा सकता है।



The despair, anger, worries, frustration, etc. hidden in your mind can only be eliminated by understanding the “science of mind”.

विश्व खराब हो गया है, ऐसा नहीं है। आप जैसे हैं, विश्व आपको वैसा ही नजर आता है। विश्व शुरू से ऐसा है; ना यहां पर धर्म-युग कभी आया है न पापी-युग। यहां का सबकुछ सदैव से सिर्फ मनुष्य की दृष्टि पर निर्भर रहा है।



It is not that the world has deteriorated today. You perceive the world as you are. The world has been the same from the very beginning; neither has there been a virtuous age (Dharma yuga) nor a sin age (Papi yuga). Here, everything has always been dependent on an individual’s perspective with which he looks at it.

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