March 4, 2015 9:30 am

यदि अन्यों से हम अपने को विशिष्ट मानकर व्यवहार करने की अपेक्षा छोड़ दें तो हमारे सारे दुःख तिरोहित हो जायें। जब बुद्ध से लेकर जीसस तक के श्रेष्ठ ऐतिहासिक पुरुषों को अपने समय में किसी ने नहीं समझा तो आप क्यों ‘‘आपको कोई समझे’’…उसकी अपेक्षा किये बैठे हैं?

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